वस्तु एवं सेवाकर ;ळैज्द्ध की दरो में परिवर्तन (2019)

 

श्रीमती सीमा अग्रवाल1, डाॅ. विजय अग्रवाल2

1शोधार्थी, सहायक प्राध्यापिका, विप्र कला, वाणिज्य एवं शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय, रायपुर (..)

2निर्देशक, विभागाध्यक्ष, शासकीय जे. योगानंद्म .. महाविद्यालय, रायपुर (..)

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साथ ही छोटे कारोबारियों को राहत देते हुए बहुत सी छूट प्रदान की गई कंपोजिशन स्कीम की सीमा में जी.एस.टी में छूट की सीमा बढ़ाकर रिटर्न भरने की अवधि में छूट प्रदान करके जिससे छोटे कारोबारी आम जनता को लाभ होने जा रहा है।

 

ज्ञम्ल्ॅव्त्क्ैरू  वस्तु एवं सेवाकर , परिवर्तन

 

 

 

 

प्रस्तावना:-

आम आदमी को नए साल का तोहफा देते हुए सरकार एक जनवरी से जनता को बहुत सी छूट वस्तु एवं सेवाकर की दरो में परिवर्तन कर प्रदान की है। साथ ही छोटे कारोबारियों को राहत देते हुए बहुत सी छूट प्रदान की गई कंपोजिशन स्कीम की सीमा में जी.एस.टी में छूट की सीमा बढ़ाकर रिटर्न भरने की अवधि में छूट प्रदान करके जिससे छोटे कारोबारी आम जनता को लाभ होने जा रहा है।

 

वित्त मंत्री अरूण जेटली की अध्यक्षता में गुड्स और सर्विस टैक्स ;ळैज्द्धकाउंसिल की 32वीं बैठक में कुछ अहम फैसले लिए गए। जिसमें छोटे कारोबारियों को राहत देते हुए सरकार ने कंपोजिशन स्कीम की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रू कर दी है।

 

बैठक में जीएसटी में छूट सीमा 20 लाख रू से बढ़ाकर 40 लाख रू वार्षिक कर दी गई है। साथ ही मुफ्त दुर्घटना बीमा की सुविधा मिलेगी। महिला कारोबारियों के लिए ज्यादा रियात। सस्ते ब्याज दर पर कर्ज ले सकेगे। ब्याज दर में दो फीसदी तक की छूट, टर्नओवर के हिसाब से बीमा की रकम तय की जायेगी।

 

पीयूष गोयल जी ने छोटे कारोबारियों को राहत दी है। जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर 50 लाख तक है उन्हें केवल 6 फीसदी ळैज् देना होगा आर टर्नओवर 5 करोड़ से कम है तो सिर्फ तीन महिने में एक बार रिर्टन भरना पडेगा।

 

सरकार ने एक जनवरी से सिनेमा टिकट, 32 इंट तक के टेलीविजन और मानिटर स्क्रीन सहित 23 वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दर कम करने की अधिसूचना जारी कर दी है। जिसमें पावर बैंक, शीतित एवं डब्बा बंद खास तरह की प्रसंस्कृत सब्जियों को शुल्क मुक्त कर दिया गया है। तथा इस बार जीएसटी काउंसिल ने वांशिग मशीन, फ्रिज, टीवी. विडियों गेम्स, जूसर मिक्सर वाॅटर कूलर जैसे मध्यवर्गीय उपयोग वाली 17 वस्तुओं को 28 फीसदी से 18 फीसदी के श्रेणी में लाकर इर पर लगने वाले टैक्स में सीधे 10 फीसदी की छूट दी है। एस पी वी (स्पेशल परपज वीइकल) ट्रक और ट्रेलर से लेकर हैडि क्राफ्ट आइटम सेंट और टाॅयलेट स्पे तक और भी कई वस्तुओं पर टैक्स में राहत दी गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि सेनटरी नैपकिन को टैक्स फ्री कर दिया गया है। जिसकी आक्रोश पूर्ण मांग पहले दिन से की जा रही थी।

 

परिषद ने दिव्यांग व्यक्तियों के काम आने वाले वाहक साधनों के कलपुर्जों पर जीएसटी की दर 28 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया माल परिवहन वाहनों के तीसरे पक्ष की बीमा प्रीमियम पर जीएसटी दर को 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी कर दिया गया। संगमरमर के अनगढ़े पत्थर प्राकृतिक कार्क टहलेन वाली छड़ियों, फ्लाई ऐश से बनी ईटे आदि पर अब पांच प्रतिशत दर से जीएसटी लगेगा, संगीत की किताबों तथा फ्रोजेन ब्रांडेड प्रसंस्करण की एैसी अवस्था वाली सब्जियों आदि पर अब जीएसटी नहीं लगेगा।

 

जनधन योजना के तहत खुले आधारभूत बचत खाते के धारकों को अब बैंकों की सेवाओं के लिये जीएसटी नहीं देना होगा, सरकार द्वारा परिचालित और अधिसूचित अथवा चार्टड उड़ानों के जरिए यात्रा करने वाले तीर्थ यात्रियों को अब पांच प्रतिशत दर से जीएसटी भुगतान करना होगा। इसके अलावा 100 तक के सिनेमा टिकटों पर अब 18 प्रतिशत के बजाय 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। सौ से अधिक की टिकटों पर 28 प्रतिशत की जगह 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।

 

अब होटल चाहे फाइव स्टार हो या हो अगर उसके कमरे का किराया 2500 रू प्रतिदिन और 7500 रू. से कम हो तो उस टैरिफ पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा। जीएसटी काउंसिल की ओर से तय रेट स्ट्रक्टर के मुताबिक 1000 रू प्रति कमरा प्रतिदिन और इससे ज्यादा लेकिन 2500 से कम हो तो टैक्स रेट 12 प्रतिशत होगा। तथा फाइव स्टार होटलों पर 28 प्रतिशत जी एसटी लगेगा।

 

 

 

 

 

 

अतः निष्कर्षतः हम यह कह सकते हैं कि वस्तु एवं सेवाकर द्वारा आम आदमी की तकलीफो को दूर करने और उनको करो के भुगतान में सुविधा हो इस हेतु इस बार सरकार ने बहुत से परिवर्तन किए जिसका लाभ जनता को जरूर मिलेगा महंगाई कम होगी। परन्तु साथ ही जनता को भी करों का भुगतान समय पर कर सरकार के राजस्व में वृद्धि करना चाहिए। ताकि आर्थिक विकाश हो सके देश का।

 

 

संदर्भ ग्रंथ सूची:

1. नवभारत टाइम्स जुलाई 24 2018

2. नवभारत टाइम्स जनवरी 11 2019

3. जीन्यूज जनवरी 2019

4. म्बवदवउपबजपउमे िप्दकपं श्रंदनंतल 2019

 

 

 

 

 


 

Received on 19.12.2018                Modified on 11.01.2019

Accepted on 25.02.2019            © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(1):204-206.